रुद्रप्रयाग : भाजपा के जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट ने विपक्ष को घेरते हुए तीखी प्रक्रिया व्यक्त की। भारत भूषण भट्ट ने कहा कि कांग्रेस का “भूमि बचाओ-धामी हटाओ” अभियान भूमि संरक्षण की मुहिम नहीं, बल्कि उसकी अपनी डूबती राजनीतिक जमीन बचाने की छटपटाहट है। जिस कांग्रेस के शासनकाल में जमीनों की बंदरबांट के आरोप लगे, वही आज भूमि संरक्षण का झूठा चैंपियन बनने का ढोंग कर रही है।
उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस को याद दिलाना चाहता हूं कि हरीश रावत सरकार के समय नानीसार में 7.061 हेक्टेयर पंचायत भूमि महज 1,200 रुपये सालाना किराये पर 30 साल की लीज पर दे दी गई और विरोध करने वाले 381 लोगों पर मुकदमे दर्ज हुए। धौलास में शैक्षणिक संस्थान के नाम पर ली गई करीब 20 एकड़ जमीन छोटे-छोटे प्लॉटों में बंटकर लगभग 80 खरीदारों तक पहुंच गई। कांग्रेस पहले अपने शासनकाल का भूमि आवंटन रिकॉर्ड सार्वजनिक करे, फिर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर सवाल उठाए।

भारत भूषण भट्ट ने कहा कि मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि सरकार एक इंच जमीन नहीं बेच रही है। जमीन की मालिक सरकार ही रहेगी, निवेशक को केवल तय समय के लिए पट्टा मिलेगा। “7,000 बीघा जमीन बेचने” का आरोप भ्रामक है, अब तक केवल तीन बोलियां आई हैं और कोई भी तय नहीं हुई। धामी सरकार ने लगभग 13,000 एकड़ सरकारी जमीन अवैध कब्जों से मुक्त कराई, डिजिटल भूमि रिकॉर्ड बनाया और सख्त भू-कानून लाकर बाहरी लोगों के लिए कृषि भूमि खरीदना कठिन किया। जो सरकार कब्जे हटा रही है, क्या वह जमीन लुटाएगी?
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की केवल 14 प्रतिशत जमीन खेती योग्य है और पहाड़ में सिर्फ 10 प्रतिशत खेतों में सिंचाई है। वर्षों से ताले लगी बंद फैक्ट्रियों, खाली सरकारी भवनों और बेकार पड़ी जमीनों पर उद्योग और पर्यटन परियोजनाएं आएंगी तो पहाड़ के युवाओं को घर के पास रोजगार मिलेगा और पलायन रुकेगा। वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 6.03 करोड़ यात्री उत्तराखंड आए। केदारनाथ यात्रा वाले हमारे रुद्रप्रयाग जिले में बेहतर सुविधाओं का सीधा लाभ यहां के टैक्सी चालकों, होटल-ढाबा संचालकों, दुकानदारों और किसानों को मिलेगा।
भारत भूषण भट्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि कांग्रेस का दोहरा चरित्र भी जनता के सामने है। तेलंगाना में कांग्रेस सरकार अडानी समूह के 12,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का स्वागत करती है और कर्नाटक में किसानों की 1,777 एकड़ उपजाऊ जमीन एयरोस्पेस पार्क के लिए लेने चली थी, लेकिन उत्तराखंड में निवेश का विरोध करती है।
