देवभूमि में साहित्य एवं ज्ञान परम्परा के पुनर्जागरण का ध्वजवाहक बना बुक फेस्टिवल: युवराज मलिक

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत सरकार द्वारा देहरादून में पहली बार आयोजित दून पुस्तक महोत्सव का रविवार को विधिवत समापन हो गया। नौ दिन की इंद्रधनुषी यात्रा में यह आयोजन अभिनव रचनात्मक गतिविधियों, विचार मंथन सत्रों तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से देहरादून के कला एवं साहित्य प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहा। पुस्तक महोत्सव के आयोजक एन.बी.टी. के निदेशक युवराज मलिक ने एक साक्षात्कार में आयोजन से जुड़ी बातों पर विस्तार से चर्चा की।

युवराज मलिक ने उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, जिला प्रशासन, नगर निगम, देहरादून की मीडिया और देहरादून की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं यह मानता हूं कि यह सिर्फ एक महोत्सव नहीं था, बल्कि देवभूमि उत्तराखण्ड की साहित्यिक यात्रा का एक पड़ाव भर था। इसलिए यह यात्रा का समापन नहीं बल्कि शुरूआत है, जो बहुत शानदार रही। इस महोत्सव के प्रबंधन को लेकर मुझे कई लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

उन्होंने कहा कि जब हम इस आयोजन की योजना बना रहे थे तो उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हमारी बात हुई। उनका सुझाव था कि यह आयोजन ऐसा हो जो देवभूमि के साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान को और आगे बढ़ाने का काम करे। वे चाहते थे कि यह आयोजन उत्तराखण्ड के साहित्यिक विकास में मील का पत्थर साबित हो और हमने उसी अनुरूप प्रयास किये। हमने मुख्यतः बच्चों और युवा पीढ़ी को पुस्तकों के नजदीक लाने का प्रयास किया। बच्चों के लिए रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की गयी, ताकि वे अधिक से अधिक संख्या में पुस्तक मेले में पहुंचें। युवाओं को विचार परम्परा से जोड़ने के लिए साहित्य, फिल्म, कला, विज्ञान के क्षेत्र से श्रेष्ठ लोगों को महोत्सव में आमंत्रित किया गया। मुख्यमंत्री द्वारा गढ़वाली और कुमाउंनी भाषा में लिखित पुस्तकों का विमोचन किया गया। देश और देवभूमि के प्रमुख सांस्कृतिक कलाकारों द्वारा कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये। वृहद रूप से देखें तो महोत्सव में साहित्य, कला और संस्कृति और विशेषकर क्षेत्रीय भाष के साहित्य व संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला।

युवराज मालिक ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की जो सोच है कि युवा पीढ़ी में पुस्तकों के प्रति उत्साह बढ़े और बच्चे डिजिटल उपकरणों से अधिक रचनात्मक और वैचारिक गतिविधियों का हिस्सा बनें। आयोजन के दौरान भी मुख्यमंत्री का मार्गदर्शन हमें निरंतर मिलता रहा। एन.बी.टी. ने इसी मार्गदर्शन से प्रेरणा लेकर बुक फेस्टिवल का आयोजन किया। हमें संतुष्टि है कि इस आयोजन में हर आयुवर्ग के लोगों ने हिस्सा लिया, विशेषकर स्कूली बच्चों और युवाओं ने इस विचार को अपनाया।

उन्होंने कहा कि इस महोत्सव में जिस प्रकार से दूनवासियों ने उत्साह का परिचस दिया है और महोत्सव में सहभागी बने हैं। भविष्य में इस पुस्तक महोत्सव को और भी अधिक रचनात्मक और भव्यतापूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की समृद्ध ज्ञान परंपरा और गौरवशाली साहित्यिक धरोहर को संजोना हम सबका सामूहिक प्रयास रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लोककलाओं और लोकसाहित्य को बढ़ावा देने और राज्य में पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु जिस तरह से साहित्य ग्राम बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं, यह हमारी इस यात्रा की सार्थकता को परिपूर्ण करेगा। उत्तराखण्ड जिस तरह से आध्यात्म और पर्यटन के विश्व मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान रखता है, उसी प्रकार सांस्कृतिक और सांस्कृतिक क्षितिज पर दैदीप्यमान हो, यही हमारा प्रयास है और यही कामना भी है।

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