उत्तराखंड में ट्रैफिक जाम को कम करने और चारधाम यात्रा को सुगम बनाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा ऋषिकेश बाईपास के 4-लेन निर्माण के लिए ₹1105.79 करोड़ की मंजूरी दिये जाने पर प्रदेश के पर्यटन धर्मस्व, संस्कृति, लोक निर्माण, सिंचाई और ग्रामीण निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा का आभार जताया है।

प्रदेश के पर्यटन धर्मस्व, संस्कृति, लोक निर्माण, सिंचाई और ग्रामीण निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि 12.67 किमी लंबा यह नया एनएच-7 बाईपास नेपाली फार्म (तीनपानी) के पास से शुरू होकर खारास्रोत तक बनेगा, जिससे ऋषिकेश शहर के भीतर लगने वाले जाम से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना उत्तराखण्ड राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग-07 पर भट्टोवाला ढालवाला होते हुए खाराश्रोत पुल तक प्रस्तावित 4 लेन ऋषिकेश बाईपास (पैकेज-01) के निर्माण से सम्बन्धित है। प्रस्तावित बाईपास की कुल लम्बाई 12.670 कि.मी है, जिसमें 4.876 कि.मी एलिवेटेड संरचना, 0.50 कि.मी वायाडक्ट सहित मुख्य पुल, 42 मीटर लघु पुल, 3 अंडरपास (0.364 कि.मी), 1 रेल ओवर ब्रिज (184 मीटर), 1 ओवरपास (120 मीटर), 1 राउंडअबाउट इंटरसेक्शन, 1 राउंडअबाउट जंक्शन सम्मिलित हैं।

महाराज ने कहा कि भारत सरकार द्वारा परियोजना के लिए ₹1109.79 करोड़ की स्वीकृति प्रदान करना एक बड़ी पहल है। ऋषिकेश चारधाम यात्रा (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) का प्रमुख प्रवेश द्वार है, जहाँ से राष्ट्रीय और क्षेत्रीय यातायात का अत्यधिक दबाव शहर के भीतर से होकर गुजरता है। भारी यातायात, पर्यटक वाहनों तथा तीर्थयात्रियों की अधिक संख्या के कारण ऋषिकेश शहर में प्रायः यातायात जाम की स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे आवागमन में विलम्ब और सड़क सुरक्षा सम्बन्धी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। विशेष रूप से चारधाम यात्रा अवधि और कांवड़ यात्रा के दौरान यातायात का दबाव और अधिक बढ़ जाता है। प्रस्तावित बाईपास के निर्माण से बाहरी यातायात को शहर में प्रवेश किये बिना सुचारु रूप से संचालित किया जा सकेगा, जिससे ऋषिकेश नगर में यातायात दबाव में उल्लेखनीय कमी आयेगी। यह परियोजना तपोवन एवं आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को भी बेहतर बनाएगी।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना पर्यटन एवं तीर्थाटन को प्रोत्साहित करेगी, सड़क सुरक्षा में सुधार करेगी और क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी। इसके अतिरिक्त, परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे और राज्य की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी सुदृढ़ होगी।

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