साहित्य, संवाद और संगीत से सजा दून लिट फेस्ट

दून बुक फेस्ट में ‘दून लिट फेस्ट’ के अंतर्गत विभिन्न महत्वपूर्ण साहित्यिक सत्रों का आयोजन किया गया। पहले सत्र में लेखक बर्जिस देसाई द्वारा उनकी पुस्तक ‘मोदीज मिशन’ पर विचार साझा किए गए। उन्होंने अपने सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन, उनकी शिक्षा और प्रारंभिक जीवन पर विस्तृत चर्चा की। भारतीय लेखक, पटकथा लेखक और स्तंभकार अ‌द्वैत काला के साथ संवाद सत्र में बर्जिस देसाई ने कहा, ’50 साल बाद जब इतिहास लिखा जाएगा तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सही मूल्यांकन होगा।’

दून लिट फेस्ट के दूसरे सत्र में कुलप्रीत यादव ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के कम चर्चित पहलुओं पर चर्चा की। कर्नल आर. एस. सिद्धू के साथ संवाद सत्र में लेखक कुलप्रीत यादव ने रेजांगला युद्ध और भारतीय सेना के शौर्य की गाथा सुनाई। चर्चा के दौरान उन्होंने अपनी पुस्तक ‘बैटल ऑफ नारलौन’ और राव तुला राम की वीरता की कई अनसुनी कहानियां सुनाई। मशहूर लेखक और अद्वैत शिक्षक आचार्य प्रशांत ने अपने सत्र ‘Truth Without Apology’ के माध्यम से सत्य, आत्मबोध और जीवन के मौलिक प्रश्नों पर गहरे विचार साझा किए। उन्होंने आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुख-दुख के मध्य संतुलन, रिश्तों की समझ और जीवन जीने की कला पर विस्तृत चर्चा की। एआई (AI) के प्रभाव पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, ‘AI केवल एक साधन है; लोग इसका उपयोग भी ठीक उसी तरह करेंगे, जैसे उन्होंने अब तक अन्य संसाधनों का किया है।’

‘चिल्ड्रन्स कॉर्नर’ में बच्चों के कार्यक्रम भारी उत्साह और रचनात्मक ऊर्जा के साथ संपन्न हुए। लगभग 700 छात्रों ने कहानीकार सोमाली रावत द्वारा सुनाई गई कोरियाई लोककथा का आनंद लिया, जिसने उन्हें कल्पना की एक नई दुनिया की सैर कराई। इसके बाद ‘नेस्ट मैन ऑफ इंडिया’ राकेश खत्री ने बच्चों को पक्षियों के लिए घोंसले बनाना सिखाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, जबकि ज्योति जोशी के ‘ऐपण आर्ट वर्कशॉप’ में बच्चों ने उत्तराखंड की पारंपरिक लोक कला के सुंदर रंग उकेरे। ‘कलर मी कॉर्नर’ और ‘आर्ट एंड क्राफ्ट’ जैसी गतिविधियों से भरा यह दिन बच्चों के लिए सीखने और मनोरंजन का एक यादगार अनुभव रहा।

देहरादून साहित्य महोत्सव के अंतर्गत आयोजित ‘उत्तराखंड के चर्चित कवियों का काव्य पाठ’ सत्र में साहित्य और संवेदनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती अर्चना झा ने अपनी मधुर सरस्वती वंदना से किया, जिसके बाद उन्होंने ऊर्जा और आशावाद से भरा गीत ‘मिट जाएगा अंधेरा’ तथा सैनिकों को समर्पित एक भावपूर्ण रचना प्रस्तुत की। उनके पश्चात कवयित्री रुचि बहुगुणा उनियाल ने ‘पहाड़ की औरतें’ शीर्षक कविता के माध्यम से पहाड़ी नारी के संघर्ष और अदम्य साहस का सजीव चित्रण कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रतिष्ठित कवि बु‌द्धिनाथ मिश्र ने अपनी कालजयी काव्य पंक्तियों से सत्र को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। उन्होंने ‘पारस पत्थर’ और प्राकृतिक सौंदर्य पर केंद्रित अपनी सुप्रसिद्ध रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के संपादकीय विभाग (हिंदी) से कमलेश पांडे ‘पुष्प’ के कुशल समन्वय में संपन्न हुए इस सत्र ने उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक परंपरा और काव्य चेतना को प्रभावी ढंग से मंच प्रदान किया।

द वुमनियाज़ के बाॅलीवुड मैशअप पर झूमे दर्शक

दून बुक फेस्टिवल के तीसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी मे मुबंई के ‘द वुमनियाज़’ द्वारा संगीत प्रस्तुति दी गई। खुशनुमा मौसम के बीच म्यूजिकल बैंड ने बाॅलीवुड गानों – एक लड़की भीगी भागी सी, इंतेहां हो गयी इंतजार की जैसे गीतों से शुरूआत की। इसके बाद एक के बाद एक अस्सी और नब्बे के दशक के गीतों के रिक्रियेटेड वर्जन और रिमिक्स मैशअप की प्रस्तुति देकर बैंड ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। किशोर कुमार के गानों एक लड़की भीगी-भागी सी, इंतेहा हो गई इंतज़ार की… जैसे ओल्ड इज गोल्ड गानों के नये अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आये। कार्यक्रम में बाॅलीवुड के नए और पुराने गानों का काॅकटेल पेश कर देर रात तक दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

दून पुस्तक महोत्सव 2026 के अंतर्गत आने वाले दिनों में भी विभिन्न साहित्यिक सत्र, पुस्तक चर्चाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं संवाद आयोजित किए जाएंगे, जो पाठकों और साहित्य प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने रहेंगे। इसी कड़ी में, महोत्सव के कल के कार्यक्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण होने वाले हैं, जिसमें सुप्रसिद्ध फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली का एक विशेष सत्र आयोजित होगा, साथ ही कर्नल आर. एस. सिद्धू और ब्रिगेडियर सुयश शर्मा भी अपने संवाद के माध्यम से उपस्थित दर्शकों से रूबरू होंगे।

शाम के सांस्कृतिक सत्र में दो प्रमुख बैंडों की प्रस्तुति होगी, जिसमें राजस्थान के थार रेगिस्तान (मुख्यतः बाड़मेर और जैसलमेर) से आए पारंपरिक लोक संगीतकार समुदाय ‘मांगणियार’ की कला का जादू बिखरेगा और साथ ही ‘रहनुमा लाइव’ बैंड अपनी संगीतमय प्रस्तुति से शाम को यादगार बनाएगा।

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